Hum Katha Sunate Bhajan Lyrics - Ramayam : हम कथा सुनाते

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Hum Katha Sunate Ram Sakal Gundham Ki Lyrics - Ramayam

"Hum Katha Sunate" Lyrics in Hindi & English Font , Hindi Bhajan is sung by Kavita Krishnamurthy, Hemlata and Ravindra Jain, Devotional lyrics Are written by Ravindra Jain . Music Arrange by Ravindra Jain. 

Bhajan Credits

Bhajan : Hum Katha Sunate
Singers : Kavita Krishnamurthy, Hemlata and Ravindra Jain
Writer : Ravindra Jain
Music : Ravindra Jain 

रामायण एक भारतीय टेलीविजन श्रृंखला है जो इसी नाम के प्राचीन भारतीय संस्कृत महाकाव्य पर आधारित है। यह श्रृंखला मूल रूप से 1987 और 1988 के बीच दूरदर्शन पर प्रसारित हुई थी। 

इस श्रृंखला के निर्माण, लेखन और निर्देशन का श्रेय श्री रामानंद सागर को जाता है। यह श्रृंखला मुख्य रूप से वाल्मीकि रचित 'रामायण' और तुलसीदास रचित 'रामचरितमानस' पर आधारित है। 

इस धारावाहिक को रिकॉर्ड 82 प्रतिशत दर्शकों ने देखा था, जो किसी भी भारतीय टेलीविजन श्रृंखला के लिए एक कीर्तिमान है। 

इस श्रृंखला को 2020 के कोरोना वायरस लॉकडाउन के दौरान पुनः प्रसारित किया गया था और इसने विश्व स्तर पर कई धारावाहिकों के रिकॉर्ड को तोड़ दिया था और कई नए रिकॉर्ड स्थापित किये, 

जिनमें 16 अप्रैल 2020 को 7.7 करोड़ दर्शकों द्वारा दुनिया भर में देखे जाने वाले सबसे लोकप्रिय धारावाहिक होने का कीर्तिमान भी शामिल है।

Hum Katha Sunate Bhajan Lyrics in Hindi Fonts


लव कुश यह नहीं जानते थे कि राम ही उनके पिता है परन्तु माँ सीता लव और कुश को राम के बारे में इस गीत में बताती हैं। और वही गीत लव कुश राम के सम्मुख सुनाते है.

यह गीत आप कह सकते है पुरे रामायण का सार है, जिसमे राम जी के बचपन के राज पाट से लेकर वनवास, हनुमान मिलन, सीता माँ की खोज, रावण वध , अयोध्या का दीपावली यह सब सम्मिलित है|


!!!!!! ॐ श्री महा गनाधि पते नमः !!!!!

!!!!!! ॐ श्री उमामहेश्वरा भ्या नमः !!!!!!


वाल्मीकि गुरुदेव ने, कर पंकज तीर नाम !

सुमिरे मात सरस्वती, हम पर हो खुद सवार !


मात पीता की वंदना, करते बारंबार !

गुरुजन राजा प्रजाजन,नमन करो स्वीकार !


हम कथा सुनाते राम शक्ल गुणधाम की !!!!

हम कथा सुनाते राम शक्ल गुणधाम की !!!!

ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की !!!!


जंबू द्वीपे, भरत खंडे, आर्यवरते ,भारत वर्षे !

एक नगरी है विख्यात अयोध्या नाम की !

येही जन्म भूमि है परम पूज्य श्री राम की !


हम कथा सुनाते राम शक्ल गुनधाम की !

ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की !

ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की !

 

रघुकुल के राजा धरमात्मा, चक्रवर्ती दशरथ पुण्यात्मा !

संतति हेतु यज्ञ करवाया, धर्म यज्ञ का शुभफल पाया !

नृप घर जन्मे चार कुमारा, रघुकुल दीप जगत आधारा !

चारों भ्राताओं के शुभ नाम, भरत शत्रुग्न लक्ष्मण रामा !


गुरु वशीष्ठ के गुरुकुल जाके, अल्प काल विध्या सब पाके !

पुरन हुयी शिक्षा रघुवर पुरन काम की !

हम कथा सुनाते राम शक्ल गुणधाम की !

हम कथा सुनाते राम शक्ल गुणधाम की !

ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की !


म्रीदुस्वर कोमल भावना, रोचक प्रस्तुति ढंग !

एक एक कर वर्णन करे, लव कुश राम प्रसंग !

विश्वामित्र महामुनि राई, इनके संग चले दो भाई !


कैसे राम तड़का मायी ,कैसे नाथ अहिल्या तारी !

मुनिवर विश्वामित्र तब, संग ले लक्ष्मण राम !

सिया स्वयंवर देखने, पहुचे मिथिला धाम !

 

जनकपुर उत्सव है भारी , जनकपुर उत्सव है भारी !

अपने वर का चयन, करेगी सीता सुकुमारी !

जनकपुर उत्सव है भारी !!!!


जनक राज का कठिन प्रण , सुनो सुनो सब कोई !

जो तोड़े शिव धनुष को, सो सीता पति होए !


जो तोडे शिव धनुष कठोर , सब की दृष्टि राम की ओर !

राम विनयगुण के अवतार, गुरुवर की आज्ञा सिरोद्धार !

सेहेज भाव से शिव धनु तोड़ा, जनक सुता संग नाता जोड़ा !


रघुवर जैसा और ना कोई, सीता की समता नहीं होई !

जो करे पराजित कान्ति कोटी रति काम की !

हम कथा सुनाते राम शक्ल गुणधाम की !

ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की !


सब पर शब्द मोहिनी डाली , मंत्रमुग्ध भए सब नर-नारी !

यूं दिन रैन जात है बीते, लव कुश ने सब के मन जीते !


वन गमन सीता हरन हनुमत मिलन

लंका देहेन रावण मरण, अयोध्या पुनरागमन !

सब विस्तार कथा सुनाई, राजा राम भए रघुराई !


राम राज आयो सुख दायी, सुख समृद्धि श्री घर घर आई !


काल चक्र ने घटना क्रम में, ऐसा चक्र चलाया !

राम सिया के जीवन में, फिर घोर अंधेरा छाया !


अवध में ऐसा ऐसा ऐक दिन आया, निष्कलंक सीता पे प्रजा ने !

मिथ्या दोष लगाया, अवध में ऐसा ऐसा ऐक दिन आया !


चलदी सिया जब तोड़कर, सब स्नेह-नाते मोह के !

पाषाण हृदयो में ना, अंगारे जगे विद्रोह के !

ममतामयी माओ के, आँचल भी सिमट कर रेह गए !

गुरुदेव ज्ञान और नीति के, सागर भी घट कर रेह गए !


ना रघुकुल, ना रघुकुल नायक !

कोई ना सिया का हुआ सहायक !

मानवता को खो बैठे जब !

सभ्य नगर के वासी, तब सीता को हुआ सहायक !

!!!! वन का एक सन्यासी !!!!


उन ऋषि परम उदार का, वाल्मीकि शुभ नाम !

सीता को आश्रय दिया, ले आए निज धाम !


रघुकुल में कुलदीप जलाए, राम के दो सूत सियने जाये !


श्रोता गण जो एक राजा की पुत्री है ,एक राजा की पुत्रवधू हैं ,और एक चक्रवती सम्राट की पत्नी है वोही महाराणी सीता,वनवास के दुखो में अपने दिनो कैसे काटती हैं अपने कुल के गुरुवर और स्वाभिमान की रक्षा करते हुये किसी से सहायता मांगे बिना कैसे अपने काम वो स्वयं करती है स्वयं वन से लकड़ी काटती है, स्वयं अपना धान कूटती है, स्वयं अपनी चक्की पीसती हैं, और अपनी संतान को, स्वावलंबन बनने की शिक्षा कैसे देती है, अब उसकी करुण झांकी देखिये


जनक दुलारी कुलवधु दशरथ जी की ,

राजा रानी हो के दिन वन में बिताती हैं !

रेहती थी घेरी जिसे दास-दासी आठो यम !

दासी बनी अपनी उदासी को छूपाती है !

धरम प्रवीन सती परम कुलिन सब !

विधि दोशहीन, जीना दुख में सिखाती हैं


जगमाता हरी-प्रिय लक्ष्मी स्वरूप सिया !

कूटती है धान भोज स्वयं बनाती है !

कठिन कुल्हाड़ी लेके लकड़िया कांटती है !

करम लिखेको पर काट नहीं पाती है !


फूल भी उठाना भारी जिस सुकुमारी को था !

दुख भरी जीवन बोज वो उठाती है !

अर्धांगी रघुवीर की वो धरधीर !

भर्ती है नीर नीर जलमें नेहलाती है !


जिसके प्रजाके अपवादों कुचक्रा में !

वो पीसती है चक्की स्वाभिमान बचाती है !

पालती है बच्चों को वो कर्मयोगिनी के भाति !

स्वाभिमानी स्वावलंबी सफल बनाती हैं !

ऐसी सीता माता की परीक्षा लेते दुख देते !

निठुर नियति को दया भी नहीं आती है !


ओ उस दुखिया के राज-दुलारे !

हम ही सूत श्री राम तिहारे !


ओ सीता माँ की आँख के तारे !

लव-कुश है पितु नाम हमारे !


हे पितु भाग्य हमारे जागे !

राम कथा कही राम के आगे !


Hum Katha Sunate Bhajan Lyrics in Englsih Fonts


Om Shree Maha

Ganadhi Patey Namah

Om Shree Umamaheshawara Bhya Namah


Vaalmiki Gurudeva Ne

Kar Pankaj Teer Naam

Sumire Maat Saraswati

Hum Par Ho Khud Sawaar

Maat Peeta Ki Vandana

Karte Baaram Baar

Gurujan Raaja Praja

Jan Naman Karo Svikaar


Hum Katha Sunate Ram Sakal Gundham Ki

Hum Katha Sunate

Ram Sakal Gundham Ki

Yeh Ramayan Hai

Punya Katha Shrii Ram Ki


Jambu Dweepebharat Khande

Aryavarte Bharat Varshe

Ek Nagari Hai Vikyat Ayodhya Naam Ki

Yehi Janma Bhoomi Hai

Param Pujya Shrii Ram Ki

Hum Katha Sunate

Ram Sakal Gun Dham Ki

Yeh Ramayan Hai

Punya Katha Shrii Ram Ki

Yeh Ramayan Hai

Punya Katha Shrii Ram Ki


Raghukul Ke Raja Dharmatma

Chakravarti Dashrath Punyatma

Santati Hetu Yagya Karvaya

Dharm Yagya Ka Shubh Phal Paya

Nrip Ghar Janme Char Kumaraa

Raghukul Deep Jagat Adhaara

Charon Bhratonke Shubh Naama

Bharat Shatryghna Lakshman Rama


Hum Katha Sunate Ram Sakal Gun Dhaam Ki Bhajan Lyrics

Guru Vashishtha Ke Gurukul Jaake

Alpa Kaal Vidya Sab Paake

Puran Huyi Shiksha

Raghuvar Puran Kaam Ki

Hum Katha Sunate

Ram Sakal Gun Dham Ki

Yeh Ramayan Hai

Punya Katha Shrii Ram Ki

Yeh Ramayan Hai

Punya Katha Shrii Ram Ki


Mruduswar Komal Bhavana

Rochak Prastuti Dhang

Ek Ek Kar Varnan Kare

Lav-kush Ram Prasang

Vishwamitr Mahamuni Raayi

Inke Sang Chale Do Bhai


Kaise Ram Tadka

Kaise Naath Ahilya Taari

Munivar Vishwamitra Tab

Sang Le Lakshman Ram

Siya Swayamvar Dekhne

Pahunche Mithila Dham


Janakpur Utsav Hain Bhaari

Janakpur Utsav Hain Bhaari

Apne Var Ka Chayan

Karigi Sita Sukumari

Janakpur Utsav Hain Bhaari


Janak Raj Ka Kathin Pran

Suno Suno Sab Koi

Jo Tode Shiv Dhanush Ko

So Sita Pati Hoye

Jo Tore Shiv Dhanush Kathor

Sab Ki Drishti Ram Ki Oar

Ram Vinaygun Ke Avtaar

Guruvar Ki Aagya Siroddhar

Sehej Bhaav Se Shiv Dhanu Toda

Janak Suta Sang Naata Joda


Raghuvar Jaisa Aur Na Koi

Sita Ki Samata Nahin Hoyi

Jo Kare Parajit Kaanti Koti Rati Kaam Ki

Hum Katha Sunate Ram Sakal Gundham Ki

Yeh Ramayan Hai Punya Katha Siya Ram Ki


Sab Par Shabd Mohini Daali

Mantramugdha Bhaaye Sab Nar Naari

Yun Din Rain Jaat Hain Beete

Lav-kush Ne Sab Ke Mann Jeete

Van Gaman Sita Haran Hanumat Milan

Lanka Dehen Ravan Maran

Ayodhya Punaraagaman

Sab Vistar Katha Sunaayi

Raja Ram Bhaye Raghuraai

Ram-raj Aayo Sukh Daayi

Sukh Samriddhi Shrii Gharghar Aayi


Kaal Chakra Ne Ghatna Kram Mein

Aisa Chakra Chalaya

Ram Siya Ke Jeevan Mein

Phir Ghor Andhera Chaaya!!


Avadh Mein Aisa Aisa Ek Din Aaya

Nishkalank Pe Praja Ne

Mithya Dosh Lagaya

Avadh Mein Aisa Aisa Ek Din Aaya


Chadi Siya Jab Todke

Sab Sneh-naatae Moh Ke

Pashan Hridayonmein Na

Angaare Jage Vidhroha Ke

Mamtamayi Maaonke

Aanchal Bhi Simat Kar Reh Gaye

Gurudev Gyan Aur Neeti Ke

Sagar Bhi Ghat Kar Rehgaye


Na Raghukul Na Raghukul Nayak

Koi Na Hua Sia Ka Sahayak

Maanavta Ko Kho Baithe Jab

Sabhya Nagar Ke Vaasi

Tab Sita Ko Hua Sahayak

Van Ka Ek Sanyaasi


Un Rishi Param Udaar Ka

Valmiki Shubh Naam

Sita Ko Aashray Diya

Le Aaye Nij Dham..


Raghukul Mein Kuldeep Jalaye..

Ram Ke Do Sut Siya Ne Jaaye..


Shrota Gan Jo Ek Raja Ki Putri Hain

Ek Raja Ki Putrvadhu Hain

Aur Ek Chakravati Samrat Ki Patni Hain

Wohi Maharani Sita

Vanvaas Ke Dukho Mein

Apne Dino Kaise Kaat Ti Hain

Apne Kul Ke Gaurav Aur

Swabhimaan Ki Raksha Karte Huye


Kisi Se Sahayta Maange Bina

Kaise Apna Kaam Woh Swayam Karti Hain…

Swayam Van Se Lakdi Kaant Ti Hain

Swayam Apna Dhaan Kootti Hain

Swayam Apni Chakki Peesti Hain

Aur Apni Santaanonko

Swavalambi Banane

Ki Shiksha Kaise Deti Hain

Ab Uski Karun Jhaani Dekhiye


Janak Dulari Kulavadhu

Dasharath Ji Ki Raj Rani Ho

Ke Din Van Mein Bitati Hain

Rehti Thi Gheri Jise

Das- Dasi Aatho Yam

Daasi Bani Apni

Udaasi Ko Chupati Hain…

Dharam Praveena

Sati Param Kulina Sab

Vidhi Dosh-hina

Jina Dukh Mein Sikhati Hain


Jagmata Hari-priya Lakshmi Swarupa Siya

Koonti Te Hain Dhaan Bhoj Swayam Banati Hain

Kathin Kulhadi Leke Lakdiya Kaant Ti Hain

Karam Likhe Ko Par Kaant Nahi Paati Hain…


Phool Bhi Uthana Bhaari Jis Sukumari Ko Tha

Dukh Bhari Jeevan Woh Uthathi Hain

Ardhangi Raghuveer Ki Woh Dhare Dheer

Bharti Hai Neer Neer Jal Mein Nehlati Hain


Jiske Prajake Apvaadon

Kuchakra Mein

Peesti Hai Chaaki

Swabhiman Bachati Hain

Paalti Hain Bachchonko

Woh Karmayogini Ke Bhaati

Swavalambi Safal Banati Hain

Aisi Sita Mata Ki Pariksh Leti

Nithur Niyati Ko Daya Bhi Nahi Aati Hain


O…us Dukhiya Ke Raj-dulaare

Hum Hi Sut Shrii Ram Tihaare


O….Sita Maa Ki Aankh Ki Taare…ee

Lav-kush Hain Pitu Naam Hamare

He Pitu Bhagya Hamare Jaage

Ram Katha Kahe Ram Ke Aage


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